Monday, October 21, 2024

तुम हुस्न पारी, तुम जाने जहाँ ... पर माफ़ करना ।

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ऐसा नहीं है की ख़ूबसूरती में कुछ कमी है,

हो तुम भी एक हुस्न पारी,

आँखें ऐसी जैसे गहरी झीलें,

पर हमको बस हमारे किनारो की तलब है 

इन आँखों में डूब न सकेंगे, माफ़ करना। 


मुस्कान ऐसी जो समां कर दे रंगीन , 

पर हम बस अब अपने काले-सुफैद में खुश है,

इस मुस्कान पर मर-मिट न सकेंगे, माफ़ करना। 


बातें ऐसी जिनसे पहरों गुज़र जाये,

पर हम बस १०-१५ मिनट के BREAK लिया करते है, 

इन बातों को सुन न सकेंगे, माफ़ करना। 


घनेरे गेसू, लेहरायें ऐसे जैसे खुशनुमा फ़िज़ा, हों भीगे तो देते ताज़गी का मज़ा, 

और हमारे तो उजड़े चमानों की चर्चायें होती है 

इन ज़ुल्फ़ों में खो न सकेंगें, माफ़ करना। 


तो ऐसा बिलकुल नहीं है की आप एक मंज़िल नहीं है 

ये तो बस हम है के इन रास्तों पे चल न सकेंगे, माफ़ करना। 

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