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A recitation of the same has been captured with a calming music.
Click on the link to check it out: Shambhu
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मैं हूँ उद्गम,
मैं हूँ आकाश,
मै हूँ पाताल,
है शक्ति मेरी अर्धांगिनी,
मुझ से जुड़े जल, धारा, नभ, अग्नि ।
मेरे अंदर से रचयिता जन्मा,
कहते उसे विष्णु - ब्रह्मा ।
मेरा निवास, मेरा कैलाश
मैं हूँ अधिपति योग - साधना
मेरे ध्यान से खुलती है रचना ।
गजमुख पुत्र गणेश विघ्नहर्ता,
बुद्धि के दीप जलाएं हर पथता
कान्तिवान कार्तिक वीर मेरा बच्चा,
शत्रु-दलों का संहार करे जो सच्चा ।
है नंदी मेरा परम भक्त,
सच्ची भक्ति यत्र तत्र सर्वत्र ।
रावण भी है मेरा पुजारी,
वीणा के तारों पर गाता त्रिपुरारी,
शिवा तांडव के मंत्रों से भरपूर,
मेरी स्तुति में उसका हर मस्तक चूर,
जब मन हुआ तो नाच उठूँ,
तांडव मस्ती में झूम उठूँ ।
मैं भस्म हूँ मैं गंगा,
त्रिनेत्र जलाए जब खुल जाए,
त्रैलोक्य काँपें दिशाएँ सिहर जाए ।
ना आदि मेरा, ना अंत कोई,
मैं शिवा हूँ, मैं सत्य स्वरूप,
मैं शम्भू, मैं शम्भू, मैं शम्भू …
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