Saturday, May 5, 2012

आक्रोश...


आक्रोश ही आक्रोश, आक्रोश ही आक्रोश,
कल कल में आक्रोश, हर पल में आक्रोश,

नन्हों की आँखों में आक्रोश, बुजुर्गों की बातों में आक्रोश,
खुद की ज़िन्दगी से आक्रोश, किसी की मौत पे आक्रोश,
ट्रेनों में धक्के खाता आक्रोश, कतारों में पसीना बहाता आक्रोश,
दफ्तरों में दी गयी अर्जियों में आक्रोश, और वहा से आये हुए आदेशों में आक्रोश,
सत्ता का आक्रोश, अप्रधानियों का आक्रोश,
सेवाओं में आक्रोश, बाधाओं में आक्रोश,
विमोचन कें आक्रोश, वसूली में आक्रोश,
रिश्तों में आक्रोश, विरह में आक्रोश,
नजदीकियों में आक्रोश, दूरियों में आक्रोश,
आक्रोश ही आक्रोश, आक्रोश ही आक्रोश,

अतीत से कराहता आक्रोश, भविष्य को चिल्लाता आक्रोश,
मन का आक्रोश, चेहरे का आक्रोश,
आशाओं में आक्रोश, निराशाओं में आक्रोश,
उम्मीदों में आक्रोश, सपनो में भी आक्रोश,
फरमाइशों में आक्रोश, गुजारिशों में आक्रोश,
सफ़र में आक्रोश, मंजिल पर आक्रोश,
आक्रोश ही आक्रोश, आक्रोश ही आक्रोश,

सोच में आक्रोश, सोच के पालन में आक्रोश,
विष में आक्रोश, अमृत में आक्रोश,
दुआ और बद्दुआ में आक्रोश,
आक्रोश ही आक्रोश, आक्रोश ही आक्रोश,

हर दम मचलता आक्रोश, कुछ क्षण ठहरता आक्रोश,
सुलगता आक्रोश, सुलगाता आक्रोश,
खुद ही झुलसता आक्रोश, औरों को झुलसाता आक्रोश,
हक में आक्रोश, कर्त्तव्य में आक्रोश,
आधीन रहती रूहों का आक्रोश, स्वाधीनता को छूती रूहों का आक्रोश,
आक्रोश ही आक्रोश, आक्रोश ही आक्रोश,

बेपरवाह और बेरहम ये आक्रोश,
रुलाता और फिर सुलता ये आक्रोश,
सीने की गहराईयों में दबा, सहमा, पर दहाड़ने को आतुर ये आक्रोश,
झिंझोड़ता और थप्पड़ों की आवाज़ से निकलता ये आक्रोश,
स्वतंत्र विचरण करता एक मवेशी ये आक्रोश,
ले डूबा गोताखोरों को ये आक्रोश,
लाइलाज बिमारी सा ये आक्रोश, लाइलाज बिमारी सा ये आक्रोश...

आक्रोश ही आक्रोश, आक्रोश ही आक्रोश,
आक्रोश ही आक्रोश, आक्रोश ही आक्रोश....!!

2 comments:

Aakanksha said...

Back on track with a bang!Good to see a different genre in your poem. Keep writing..! Hoping to see more different genres too on the recent celebrations :)
Wishes again!

Mrs. Shreya said...

woohhooo ... i am lost now but while reading ... some how with every line i got some connection ... but the big question is 'why do we have so much of aakrosh???'... is it already there within us or is it growing with in us because of what is going on outside us ... but its great to read a new n different color of your writing ... keep up the brilliant work honey :D