=================================
तू है तो बता, दे पता
घर का नहीं, तो मोहल्ले का
फिर इंतज़ार कर, हल्ले का
जो मैं करूँगा, हाँ हर्ज़ाना भी भरूंगा।
तू है तो बता, दे पता...
मैं तो हूँ ही, तेरी भी होगी बदनामी
मेरी भी बहुत हुई, और बस कर तेरी भी मनमानी
मनमानी महंगी पड़ती है, मत भूल
मैं ने नहीं बनाया, तेरा ही है ये उसूल।
तो तू है तो बता, दे पता...
रात बहुत हो चुकी है तमाशा मत बना
मेरी आँखों को निराशा मत दिखा
आपस के गीले है दूर कर लेंगे
ताना-कसाई, तू-तू मैं-मैं, भरपूर करलेंगे।
इसीलिए पूछ रहा हूँ, तू है तो बता, दे पता...
दो दिन हुए, आसमान दिया था
फिर पर काट दिए, मैं उड़ ही तो रहा था
उड़ने से दिक्कत है तो बोल, कम उडूंगा
पंख इस्तेमाल कैसे करते है, पहले ये पढूंगा।
तो तू है तो बता, दे पता...
माना मुझे आता नहीं दिया लगाना, माथा टेकना
और पता नहीं कहाँ से सीखा मैंने ऐसे दुनिया देखना
नया कुछ सीखेंगे और बदलेंगे रवैया भी
शायद तभी ठीक से चलेगा जीवन का पहिया भी।
इन सब में समय लगेगा इसीलिए तू है तो बता, दे पता...
चल माना तू नहीं है, तो कोई और होगा, उसका पता दे
और वो नहीं तो कोई और होगा, वो बता दे
और अगर फिर भी कोई नहीं, तो क्या बस मैं हूँ
बड़ा उलट-फेर हो जायेगा गर बस मैं हूँ।
बोल...तू है तो बता, दे पता...
No comments:
Post a Comment